Wednesday, August 16, 2017

बंगाल के गवर्नर जनरल

ब्रिटिस सरकार ने 1772 में रेग्यूलेटिंग एक्ट नामक कानून बनाकर उसे भारत में पारित करके द्वैध शासन पद्धति की कुप्रथा बंद करके गवर्नर की प्रथा शुरू की । इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स को बंगाल का प्रथम गवर्नर नियुक्त किया गया । वारैन हेस्टिंग्स ने सरकारी खजाने का स्थानांतरण मुर्शिदाबाद से कलकत्ता कर दिया । और कलकत्ता में ही सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की । इसने प्रत्येक जिले में एक दीवानी तथा फौजदारी न्यायालय का गठन किया । इसने गीता के अंग्रेजी अनुवाद बिलियन विल्किन्स को आश्रय दिया । सन 1784 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट ने 'पिट का इंडिया एक्ट' पारित किया । जिसका उद्देश्य गवर्नर जनरल के कार्य पर निगरानी रखना था । इसके लिए 6 सदस्यों की समिति नियुक्त की गई । जिन्हें बोर्ड ऑफ रेवेन्यु या बोर्ड ओफ कंट्रोल कहा गया । इस एक्ट के विरोध में वारेन हेस्टिंग्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया । फिर वह इंग्लैंड पहुंचा तो ब्रिटिश पार्लियामेंट ने उस पर भ्रष्टाचारी का आरोप लगाकर महाभियोग चलाया । किंतु बाद में यह दोषमुक्त निकला । इसके बाद 1886 में लार्ड कार्नवालिस बंगाल का गवर्नर बना । इसने भारत में सिविल सर्विस की स्थापना की । इसलिए इसे भारतीय नागरिक या प्रशासनिक सेवा का जनक कहा जाता है । सिविल सर्विस सदस्यों की नियुक्ति 1833 तक निर्देशों के द्वारा की जाती थी । उसके बाद प्रतियोगिता परीक्षा शुरू की गई । लोर्ड कार्नवालिस ने थाने बनवाकर उनमे पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की । कार्नवालिस ने न्याय व्यवस्था में जितने सुधार किए उन्हें एकत्रित कर 1793 में कार्नवालिस कोड नाम दिया गया । जो शक्ति प्रथक्करण के सिद्धांत पर आधारित था । सन 1773 में कॉर्नवॉलिस ने ही बंगाल, बिहार और उड़ीसा में स्थाई बंदोबस्त लागू किया । जिसके द्वारा जमींदारों को भू-स्वामी माना जाता था । इसमें भारत का 19% हिस्सा शामिल था । इसमें 21 मे से 10 भाग कंपनी के और 11 भाग जमींदार के होते थे । तमिलनाडु, मद्रास और मुंबई में थॉमस मुनरो तथा कैप्टन रीड ने रैयतवाड़ी व्यवस्था लागू की । जिसके द्वारा भूमि जोतने वालों को भू-स्वामी माना जाता था । जो कंपनी होती थी । इसमें कुल उपज का 50% कंपनी को देना होता था । अवध क्षेत्र में महालवाड़ी व्यवस्था लागू की गई । जिसके द्वारा प्रत्येक गांव में एक निश्चित कर इखट्टा करके अंग्रेजों को देना होता था । सन् 1793 में सर जौन शोर बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसके आते ही 1793 में चार्टर एक्ट अधिनियम पारित किया गया । इतने तटस्थता तथा इस अहस्तक्षेप की नीति अपनाई । 1798 में लॉर्ड वेलेजलीबंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसने सहायक संधि द्वारा भारत के अनेक राज्यों को कंपनी के अधीन किया । इसे अपनाने वाले राजाओं को ब्रिटिश सरकार की एक टुकड़ी अपने राज्य में रखनी पड़ती थी । जो हमेशा भारतीय राजाओं के कार्यों में हस्तक्षेप किया करती थी । इसके खर्च के लिए राज्य का एक निश्चित भू-भाग कंपनी को देना होता था । यह ब्रिटिश सरकार का भारतीय राजाओं को सुरक्षा के नाम पर गुमराह करने का एक मकड़जाल था । जो इसे स्वीकार करता था वह सदैव के लिए ब्रिटिश जाल में फंस जाता था । सहायक संधि को अपनाने वाला पहला राज्य हैदराबाद था । और फिर अवध,मैशूर,पेशवा,भोसले तथा सिंधिया ने भी उसे अपना लिया । लॉर्ड वेलेजली ने ही 1801 में कोलकाता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की । जिसमें सिविल सर्विस की अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता था । वैलेजली स्वेम अपने को बंगाल का शेर कहता था । 1805 में जौर्ज बानया बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसने 1807 में दासों के व्यापार पर रोक लगा दी थी । इसने भारतीय सिपाहियों को मस्तक पर चंदन लगाने ,कानों में कुंडल और गले में माला पहनने पर पाबन्दी लगा दी । इसलिए भारतीय सिपाहियों ने वेल्लूर विद्रोह शुरू कर दिया । 1807 में लोर्ड मिन्टो 
बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसके समय में 1813 में चार्टर एक्ट पारित हुआ । 1813 में लॉर्ड हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसने नेपाल से युद्ध करके नेपाल को सुगौली की संधि के लिए मजबूर किया । इसने पिंडारियों का दमन किया और 1822 मे टैनेसी एक्ट या कास्तकारी अधिनियम पारित किया । इसने मराठाओं को अंतिम रुप से पराजित कर मराठा संघ को भंग किया 1823 मे एमहर्स्ट 
बंगाल का गवर्नर बना । इसके समय 1824 मे बैकपुर मे सैंन्य विद्रोह हुआ । 1828 मै बंगाल का गवर्नर बनकर लॉर्ड विलियम बैटिंग 
आया । इसका शासनकाल अधिकांशत: शांति और शिक्षा का काल था । इसने अहस्तक्षेप की नीति अपनाई । इसने 1829 में राजा राममोहन राय के साथ मिलकर सती प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया । इसने कन्या हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया । और ठगों को समाप्त कर दिया । 1835 में इसने कलकत्ता में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की 1835 मे इसने मैकाले की सिफारिस पर भारत मे अंग्रेजी शिक्षा शुरू की  । 1835 के चार्टर एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया । इस प्रकार विलियम बैटिंग बंगाल का अंतिम गवर्नर तथा भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बना ।

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