ब्रिटिस सरकार ने 1772 में रेग्यूलेटिंग एक्ट नामक कानून बनाकर उसे भारत में पारित करके द्वैध शासन पद्धति की कुप्रथा बंद करके गवर्नर की प्रथा शुरू की । इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स को बंगाल का प्रथम गवर्नर नियुक्त किया गया । वारैन हेस्टिंग्स ने सरकारी खजाने का स्थानांतरण मुर्शिदाबाद से कलकत्ता कर दिया । और कलकत्ता में ही सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की । इसने प्रत्येक जिले में एक दीवानी तथा फौजदारी न्यायालय का गठन किया । इसने गीता के अंग्रेजी अनुवाद बिलियन विल्किन्स को आश्रय दिया । सन 1784 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट ने 'पिट का इंडिया एक्ट' पारित किया । जिसका उद्देश्य गवर्नर जनरल के कार्य पर निगरानी रखना था । इसके लिए 6 सदस्यों की समिति नियुक्त की गई । जिन्हें बोर्ड ऑफ रेवेन्यु या बोर्ड ओफ कंट्रोल कहा गया । इस एक्ट के विरोध में वारेन हेस्टिंग्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया । फिर वह इंग्लैंड पहुंचा तो ब्रिटिश पार्लियामेंट ने उस पर भ्रष्टाचारी का आरोप लगाकर महाभियोग चलाया । किंतु बाद में यह दोषमुक्त निकला । इसके बाद 1886 में लार्ड कार्नवालिस बंगाल का गवर्नर बना । इसने भारत में सिविल सर्विस की स्थापना की । इसलिए इसे भारतीय नागरिक या प्रशासनिक सेवा का जनक कहा जाता है । सिविल सर्विस सदस्यों की नियुक्ति 1833 तक निर्देशों के द्वारा की जाती थी । उसके बाद प्रतियोगिता परीक्षा शुरू की गई । लोर्ड कार्नवालिस ने थाने बनवाकर उनमे पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की । कार्नवालिस ने न्याय व्यवस्था में जितने सुधार किए उन्हें एकत्रित कर 1793 में कार्नवालिस कोड नाम दिया गया । जो शक्ति प्रथक्करण के सिद्धांत पर आधारित था । सन 1773 में कॉर्नवॉलिस ने ही बंगाल, बिहार और उड़ीसा में स्थाई बंदोबस्त लागू किया । जिसके द्वारा जमींदारों को भू-स्वामी माना जाता था । इसमें भारत का 19% हिस्सा शामिल था । इसमें 21 मे से 10 भाग कंपनी के और 11 भाग जमींदार के होते थे । तमिलनाडु, मद्रास और मुंबई में थॉमस मुनरो तथा कैप्टन रीड ने रैयतवाड़ी व्यवस्था लागू की । जिसके द्वारा भूमि जोतने वालों को भू-स्वामी माना जाता था । जो कंपनी होती थी । इसमें कुल उपज का 50% कंपनी को देना होता था । अवध क्षेत्र में महालवाड़ी व्यवस्था लागू की गई । जिसके द्वारा प्रत्येक गांव में एक निश्चित कर इखट्टा करके अंग्रेजों को देना होता था । सन् 1793 में सर जौन शोर बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसके आते ही 1793 में चार्टर एक्ट अधिनियम पारित किया गया । इतने तटस्थता तथा इस अहस्तक्षेप की नीति अपनाई । 1798 में लॉर्ड वेलेजलीबंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसने सहायक संधि द्वारा भारत के अनेक राज्यों को कंपनी के अधीन किया । इसे अपनाने वाले राजाओं को ब्रिटिश सरकार की एक टुकड़ी अपने राज्य में रखनी पड़ती थी । जो हमेशा भारतीय राजाओं के कार्यों में हस्तक्षेप किया करती थी । इसके खर्च के लिए राज्य का एक निश्चित भू-भाग कंपनी को देना होता था । यह ब्रिटिश सरकार का भारतीय राजाओं को सुरक्षा के नाम पर गुमराह करने का एक मकड़जाल था । जो इसे स्वीकार करता था वह सदैव के लिए ब्रिटिश जाल में फंस जाता था । सहायक संधि को अपनाने वाला पहला राज्य हैदराबाद था । और फिर अवध,मैशूर,पेशवा,भोसले तथा सिंधिया ने भी उसे अपना लिया । लॉर्ड वेलेजली ने ही 1801 में कोलकाता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की । जिसमें सिविल सर्विस की अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता था । वैलेजली स्वेम अपने को बंगाल का शेर कहता था । 1805 में जौर्ज बानया बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसने 1807 में दासों के व्यापार पर रोक लगा दी थी । इसने भारतीय सिपाहियों को मस्तक पर चंदन लगाने ,कानों में कुंडल और गले में माला पहनने पर पाबन्दी लगा दी । इसलिए भारतीय सिपाहियों ने वेल्लूर विद्रोह शुरू कर दिया । 1807 में लोर्ड मिन्टो
बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसके समय में 1813 में चार्टर एक्ट पारित हुआ । 1813 में लॉर्ड हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर जनरल बनकर भारत में आया । इसने नेपाल से युद्ध करके नेपाल को सुगौली की संधि के लिए मजबूर किया । इसने पिंडारियों का दमन किया और 1822 मे टैनेसी एक्ट या कास्तकारी अधिनियम पारित किया । इसने मराठाओं को अंतिम रुप से पराजित कर मराठा संघ को भंग किया 1823 मे एमहर्स्ट
बंगाल का गवर्नर बना । इसके समय 1824 मे बैकपुर मे सैंन्य विद्रोह हुआ । 1828 मै बंगाल का गवर्नर बनकर लॉर्ड विलियम बैटिंग
आया । इसका शासनकाल अधिकांशत: शांति और शिक्षा का काल था । इसने अहस्तक्षेप की नीति अपनाई । इसने 1829 में राजा राममोहन राय के साथ मिलकर सती प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया । इसने कन्या हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया । और ठगों को समाप्त कर दिया । 1835 में इसने कलकत्ता में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की 1835 मे इसने मैकाले की सिफारिस पर भारत मे अंग्रेजी शिक्षा शुरू की । 1835 के चार्टर एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया । इस प्रकार विलियम बैटिंग बंगाल का अंतिम गवर्नर तथा भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बना ।
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