- डूप्ले के प्रयासों ने अंग्रेज और फ्रांसीसीयों के आपसी संघर्ष को जन्म दिया । इन दोनो कंपनियों की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा शीघ्र ही युद्ध में परिवर्तित हो गई । एक दूसरे को समाप्त करने की होड़ में उनमें संघर्ष होने लगे । इन संघर्षों को कर्नाटक युद्ध के नाम से जाना गया ।
(1) कर्नाटक का प्रथम युद्ध
(1744 - 1748
अंग्रेज अधिकारी बर्नेट ने फ्रान्सीसी सैना के कुछ जहाजो को लूटकर अपने कब्जे मे कर लिया । जिसकी शिकायत डूप्ले ने कर्नाटक के नवाव अनवरुद्दीन
की । तो अनवरुद्दीन क्रोधित हो उठा और अंग्रेज़ो से युद्ध करने तैयार हो गया । अब डूप्ले ने अंग्रेजों के मद्रास स्थित सेंटै जोर्ज किले का लालच देकर अनवरुद्दीन को अपनी तरफ मिला लिया । और 1744 मे प्रथम कर्नाटक युद्ध शुरू कर दिया । इस प्रकार फ्रांसीसी सेना ने अनबरुद्दीन की मदद से मद्रास स्थित ब्रिटिश किले को छीन लिया । जब अनबरुद्दीन ने डूप्ले से किले की मांग की तो डूप्ले ने किला देने से इंकार कर दिया । इसलिए कर्नाटक के नवाब अनबरुद्दीन और फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले के मध्य सेंट टोमे नामक स्थान पर घमासान युद्ध हुआ । इसे 'आमूर की लडाई' कहते है । इसमे चांदा साहब ने फ्रान्सीसीयों का समर्थन किया क्योंकि चांदा साहब अनवरुद्दीन का बहनोई था । उन दोनो मे गद्दी को लेकर विवाद था । सन् 1741 मे मराठों ने इसे बन्दी बना लिया था । जिसे अंग्रेज़ों ने आजाद करवाया था । अंग्रेजो ने 1749 मे एक्स-ला-सपेल संधि के द्वारा किला फ्रान्सीसियों से किला वापिस ले लिया । डूप्ले ने नवाव को युद्ध मे पराजित कर मार डाला । चांदा साहब ने अनवरुद्दीन के पुत्र मुहम्मद अली का तलवार लेकर पीछा किया किन्तु वह भागने मे सफल रहा इससे चांदा साहब फ्रान्सीसीयों का विश्वासपात्र बन गया और मोहम्मद अली अंग्रेजों से जा मिला । 1749 मे एक्स-ला-सपेल संधि के द्वारा प्रथम कर्नाटक युद्ध का अंत हुआ । औऱ अंग्रेजो ने अपना किला फ्रांसीसीयों से वापिस ले लिया ।
(2) कर्नाटक का द्वितीय युद्ध
(1748-1754)
द्वितीय कर्नाटक युद्ध में अंग्रेज और फ्रांसीसीयों में हैदराबाद एवं कर्नाटक के उत्तराधिकार को लेकर हुआ । फ्रांसीसी कंपनी ने हैदराबाद में मुजफ्फर जंग और कर्नाटक में चांदा साहब को शासक बना दिया । जवकि ईस्ट इंडिया कंपनी हैदराबाद में नासिरजंग और कर्नाटक में मोहम्मद अली का समर्थन कर रही थी । क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने चांदा साहब को युद्ध में पराजित कर दिया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया । उधर नासिरजंग का युद्ध में पराजित हुआ और मारा गया । इस प्रकार हैदराबाद में फ्रांसीसियों का और कर्नाटक में अंग्रेजों का शासन जम गया । पंण्डिचेरी की संधि से युद्ध समाप्त हो गया ।
(3) कर्नाटक का तृतीय युद्ध
1756 -1763)
यूरोप मे अंग्रेज और फ्रन्सीसियों में सप्तवर्षीय युद्ध शुरू होने के बाद भारत मे भी इनमे एक बार फिर ठन गई । और कर्नाटक का तृतीय युद्ध शुरू हुआ । सन् 1764 में वार्ण्डिवास के युद्ध में अंग्रेजो ने फ्रांसीसियों को पराजित कर दिया । पेरिस की संधि द्वारा यूरोप मे युद्ध समाप्त होने के बाद भारत मे भी मद्रास की संधि द्वारा फान्सीसीयों को युद्ध समाप्त करना पडा । कर्नाटक पर तो उनका अधिकार था ही साथ ही हैदराबाद से भी फ्रांसीसियों को निकाल दिया गया । और युद्द समाप्त हो गया ।
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